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Monday, 13 April 2015

रात की चादर लपेटे
एक नयी सुबह आँखों में बसाये
पलकों में तकते खड़े है ख़्वाब
इंतज़ार लिए ,जाने कब आँखों को नींद आये
सुदूर चमकता है मन के पटल पर
वो तकते ख्वाबो का साया जाने क्यों
खूबसूरत बहुत है इन्द्रधनुष की तरह और
ज़िंदगी फिर तैयार है सतरंगी रंगो में रंगने के लिए ..
Vandana Agnihotri

1 comment:

  1. पलकों में तकते खड़े है ख़्वाब
    इंतज़ार लिए ,जाने कब आँखों को नींद आये
    सुदूर चमकता है मन के पटल पर

    ----- शानदार ...

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