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Monday, 23 November 2015






एक टुकड़ा चाँद का...

एक टुकड़ा चाँद का बस ,घोला जो मैंने पानी में 
मरमरी अहसास घुला, ज्यो रंग आसमानी में 
पड़ते है कदम कुछ चलते, कुछ थमते से क्यों
घुला हो शुरुर जैसे ,इस चाँद वाले पानी में



Saturday, 21 November 2015



कुछ रिश्ते उतर आते है अंतर्मन की गहराइयो में इस तरह,सीप में छुपा रहता हो सच्चा मोती जिस तरह, जिसकी चमक बिखेर देती है उजाला अँधेरे उदास क्षणों में  और देती है सम्बल जीवन के ऊँचे नीचे रास्तो पर सतत आगे बढ़ने का. 
    जीवन एक दूर तक बहती नदी की तरह है जिसमे धार भी है ,कुछ मँझदार भी है.
कभी कड़वे अनुभव कभी, कभी मधुर क्षण . अलग अलग धाराओ को समेटे इस जीवन में मिल जाते है सच्चे रिश्ते जो रास्तो  के अंधेरो में दीपक की तरह होते हैं "प्रकाशमय" .

सच्चा साथी 

वो रोना मेरा और तेरा मुझे  गुदगुदाना
वो गुड़ियों से रूठना मेरा, तेरा मुझे हँसाना
साथ ये तब का आज तलक भाता है
सुन ये दोस्त तू याद बहुत आता है

वो चिड़ियों से की बातें शायद तुझसे ही बाटी थी 
लुका छिपा बदलो में ,उन तारो सा तुझे पाती थी 
धड़कनो की हर करवट कैसे समझ जाता है 
सुन ये दोस्त तू याद बहुत आता है

ज़िंदगी की किताब के पन्नो को पलटा, तो पाया है 
हर उम्र के अन्नुछेद में ,बस तू नजर आया है
कभी सुलझा हुआ किस्सा मेरा, कभी पहेली बन जाता है 
सुन ये दोस्त तू याद बहुत आता है ..

अँधेरे में साथ रहा , तू वो ज्योति है
सीप  में मेरे मन के, छुपा  एक मोती है 
तेरे उजियारे से ही, मेरा रास्ता जगमगाता है 
सुन ये दोस्त तू याद बहुत आता है ..






Monday, 16 November 2015



अनमोल साथी ,अनमोल पल ..

मद्धम सी साँझ से झांकते उजालों की तरह 
साथ तेरा है नदिया में धारो की तरह
टुकड़ो टुकड़ो में मिलते जो लम्हें अनमोल हैं
उतार ले खुद में चल बिखरे सितारों की तरह
समां गया आकाश लो झील की आगोश में यूँ
दूर क्षितिज पर मिलते किनारो की की तरह
चल खोज ले प्रतिबिम्ब,वो तेरा मेरा 
घुल गया हवाओ  में ,गूंजती पुकारो की तरह 
मद्धम सी साँझ से झांकते उजालों की तरह 
साथ तेरा है नदिया में धारो की तरह

Tuesday, 3 November 2015



Bliss
अब लगन लगी ...

कुछ अनकहे अहसास,झीने से दामन से झांक उठे 
ठहरी हुई चुप्पी गूंज उठी  संगीत की तरह 
इस लगन में मगन, मन मयूर बन नाच उठे 
देखो टपकी बुँदे ओंस की तरह आँखों से कहीं
जैसे सजदे में दर पे खुदा के, कई हाथ उठे...