अनमोल साथी ,अनमोल पल ..
मद्धम सी साँझ से झांकते उजालों की तरह
साथ तेरा है नदिया में धारो की तरह
टुकड़ो टुकड़ो में मिलते जो लम्हें अनमोल हैं
उतार ले खुद में चल बिखरे सितारों की तरह
समां गया आकाश लो झील की आगोश में यूँ
दूर क्षितिज पर मिलते किनारो की की तरह
चल खोज ले प्रतिबिम्ब,वो तेरा मेरा
घुल गया हवाओ में ,गूंजती पुकारो की तरह
मद्धम सी साँझ से झांकते उजालों की तरह
साथ तेरा है नदिया में धारो की तरह

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