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Monday, 22 February 2016



Thank you Dad, for giving me wings to fly

पिता को समर्पित शब्द ,कुछ भावविभोर होते से ...

दूर आसमानो पे बस्ती है, एक दुनिया तेरे सपनो जैसी 

हाँ कहा था तुमने वही है तेरी बस्ती और वही तेरी हस्ती
झांकता आकाशा से लुक छिप सतरंगी इद्रधनुष सुदूर
हां कहा था तुमने ,वही तेरा स्वरुप तुझमे है सतरंगी सी धूप
उठते गिरते रास्तो में ,फिसले जब जब कदम मेरे
हाँ कहा था तुमने , यही मेरी सीख,उठ फिर से और चलना सीख
दूर आसमानो पे बस्ती है, एक दुनिया तेरे सपनो जैसी
हाँ कहा था तुमने ,वही है तेरी बस्ती और वही तेरी हस्ती...


Friday, 19 February 2016



माँ के  तिरंगे आँचल को नमन 

वन्दे मातरम ..


जिसआँचल की छाँव में चैन से हम सोते हैं
अंक में जिसके रोज हम सपने सजोतें है
पोछें आंसूं हमारा ,जब बैचैन हम होते हैं
जिसकी शान पे मेरे भाई शरहद पे फ़ना होने हैं
नमन है तिरंगे ,तुम्हे हमारा नमन  है.
आज माँ का आँचल कुछ भीगा सा और आँखें नम हैं 
नमन है तिरंगे ,तुम्हे हमारा नमन  है.....




Tuesday, 16 February 2016


जीवन को बहने दो ..

क्यों पकड़े है मन को 
पंछी बन उड़ जाने दे
खोल दे सारी खिड़कियाँ 
कुछ तो हवा आने दे 
ज़िंदगी की सलवटों को 
कुछ खोल ,कुछ धूप दे
सीलन सी पड़ी सोच को
एक  तरोताज़ा रूप दे 
यादो के पिटारे को 
सुन्दर लम्हों से भरने दे
एक नया श्रृंगार अब तू
जीवन को करने दे 
जो हो गया वो जाने दे 
जो है अभी उसे पास रख
एक सुन्दर से कल का
मन में आभास रख
जीवन तो एक रास्ता है 
उस जीवन का तुझे वास्ता है 
और रास्ते रुकने से नहीं
चलने से तय होते हैं
मिटटी से उपजे है हम 
 एक दिन मिटटी में ही विलय होते हैं 
मौजो के साथ,खुद को मौज में रहने दो 
एक नदी की वेग सा जीवन को बहने दो 





ये हस्ताक्षर तेरे..

वक़्त के मेहराब पे  टकी  हुयी आयतो की तरह 
दुआओ में मांगी हुई खूबसूरत चाहतो की तरह 
सुदूर आकाश में सूरज सा, चमके  कभी 
मंदिरो के मुठेर पे घंटे सा, खनके कभी 
महकाएँ मन बगिया, बसंत का आभास लिए 
दूधिया चांदनी में भीगे ,कुछ अहसास लिए 
एक मीठी सी धुन जगाते हैं मन में मेरे 
ज़िंदगी के हासिये पे अंकित ये हस्ताक्षर तेरे....

Sunday, 14 February 2016






आगाज़ सुबह का कुछ अदा से किया जाएँ 
ख्वाबो को जगाये ,कुछ इरादो को उठायें 
ज़िंदगी मंज़िल पे नहीं रास्तो पे गुज़र करती है
एक और सुबह देखो फिर सफर करती है ...


सुप्रभात मित्रो ..

Saturday, 13 February 2016


इश्क,प्यार ,मोहब्बत यही शब्द गूंजते है १४  फ़रवरी  के दिन. पर प्यार क्या है? प्यार एक अवर्णनीय अनुभूति है .शब्दों और परिभाषाओ की परिधि से परे एक अपनी ही पहचान लिए अनूठा बंधन है प्यार. शब्दों के मेरे पिटारे में आज वो शब्द मुझे नहीं मिलते जो इसे परिभाषित कर पाएं पूरी तरह से .चन्द शब्दों के ताने बाने में बंधी एक छोटी सी परिभाषा प्यार की मेरा एक प्रयास ,सागर को गागर में समाहित करने का जिसके विचार भी मेरे नही ,जितना कुछ पढ़ा और समझा उन्ही से  प्रेरित दो पंक्तियों के साथ आप सबको वैलेंटाइनस डे की शुभकामनायें ...

मोहब्बत न पाना है ,न खोना है 
मोहब्बत का अंज़ाम तो, बस "मोहब्बत "होना है 





Thursday, 11 February 2016









 बसंत जीवन का...

महकते है  कुछ आँचल में समेटे हुए लम्हे,
वक़्त को मोतियों सा पिरोते हुए लम्हे 
बसंत हाँ बसंत ,देखा है जीवन का
बिताये जो कुछ हँसते ,कुछ रोते हुए लम्हे 

लो झूमते है बौराये,आम की बौर से लम्हे 
उड़ते है है पंछी बन बेठौर से लम्हें 
बसंत हाँ बसंत ,देखा है जीवन का
गुनगुनाये जो  हँसते ,कुछ रोते हुए लम्हे 

निर्झर सा बहते ,हमे भिगोते हुए लम्हे 
मद्धम सी हवाओ को ,समेटे हुए लम्हे 
बसंत हाँ बसंत देखा हैं जीवन का 
मुझमे खो जाएँ जो कुछ , हँसते कुछ रोते हुए लम्हें