Friday, 31 March 2017
Friday, 17 March 2017
एक संवाद ..
आस पास हूँ तेरे अहसास की तरह
बह रहा हूँ तुझमे सांस की तरह
बह रहा हूँ तुझमे सांस की तरह
चुभ रहा फिर सीने में क्यों दर्द है
कभी गर्म थपेड़े कभी हवा सर्द है
तपती धूप में तेरी छाया हूँ
तू खोजता मंदिरो में मैं तो तेरा साया हूँ
तू खोजता मंदिरो में मैं तो तेरा साया हूँ
दर्द तेरा पीता हूँ तुझमे मै भी जीता हूँ
तू मुझसे रूठे तो मै भी रीता रीता हूँ
बह रहा हूँ तुझमे मेरे आभास की तरह
आस पास हूँ तेरे अहसास की तरह
Wednesday, 8 March 2017
सुंदर तन की परिधि में सिमटा
एक कोमल ह्रदय ,भाव से तरबतर
और उसकी भी गहराइयों में छुपा
एक अद्भुत गहरा व्यक्तितव
अपनी अस्तित्व की खोज में
निरंतर जीवन की धुरी पे घूमता
धरा सा धैर्य और विस्तृत आकाश सा विश्वास लिए
आयी हो तुम स्वयं में बहुत कुछ खास लिए..
महिला दिवस की शुभकामनायें
साथ ही आभार उन सभी दोस्तों का जिन्होंने नारी मन की गहराइयो को समझने की और उसे स्वीकारने का प्रयास किया और सिर्फ महिला दिवस पर ही नहीं अपने जीवन में भी उसे वही सम्मान दिया जो आज यहाँ सबकी पोस्ट में दिखाई दे रहा है......
Wednesday, 1 March 2017
मन को छूती तस्वीर, जिसके स्पर्श से मन से निकले उद्गार उतर आये फिर एक रचना बन
सुदूर पर्वतों पर गूँजी है प्रतिध्वनि कोई
झरोखे का पट हौले से खोल कर
घुल कर हवाओं के साथ जैसे पहुँची है
कानो में मीठी से शब्द घोलती,सी
कुछ अनकही मुझसे बोलती सी
काफी की चुस्कियो में एक मिठास सी घोलती सी
सुदूर पर्वतो पर गूँजी है प्रतिध्वनि कोई
अपनी आहट से अनाहत जगाती हुई
कोई गीत मधुर गुनगुनाती हुई
सुदूर पर्वतो पर गूँजी है प्रतिध्वनि कोई ......
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