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Thursday, 14 July 2016






 एक गुजारिश ढलते दिन से

ये  सुबह  मेरी  ज़िंदगी की ,इससे पहले की दिन ढल जाए और शाम अपनी बाहें फैलाए
थके हुए सब पंक्षी ,करें गमन नीड की ओर
कुछ थम जा, भर लून आँचल में उजाला तेरा
अँधेरी रातो में होगा जो साथ मेरे
उन टिमटिमाते सितारों की तरह
हाँ ,कह दूंगी आसमान से तब मै
एक आकाश मेरा भी है जगमगाता है जो तेरी ही तरह..
ये  सुबह  मेरी  ज़िंदगी की ,इससे पहले की दिन ढल जाए और शाम अपनी बाहें फैलाए
कुछ थम जा ...

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