वह रास्ता खड़ा वहीँ..
रात के अंधियारे में गुम है ,पर रास्ता है खड़ा वहीँ
कुछ उलझे सुलझे विचारो में गुम है, पर रास्ता है खड़ा वहीँ
ढूंढते है हम जिसे, इधर उधर बस उम्र भर
मन में गढ़ी दीवारों में गुम हैं ,पर रास्ता है खड़ा वहीँ
बस खोल दो झरोखे मन के ,कुछ उजाला जाने दो
अंदर के हर कोने को, कुछ उजला हो जाने दो
दीवारों से झांकता तभी, दिखेगा तुम्हे वहीँ
पुकारता तुम्हे प्यार से ,वह रास्ता खड़ा वहीँ...
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