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Friday, 17 March 2017



एक संवाद ..
आस पास हूँ तेरे अहसास की तरह
बह रहा हूँ तुझमे सांस की तरह

चुभ रहा फिर सीने में क्यों दर्द है 

कभी गर्म थपेड़े कभी हवा सर्द है
तपती धूप में तेरी छाया हूँ
तू खोजता  
मंदिरो  में मैं तो तेरा साया हूँ 
दर्द तेरा पीता हूँ तुझमे मै भी जीता हूँ

तू मुझसे रूठे तो मै भी रीता रीता हूँ 
बह रहा हूँ तुझमे मेरे आभास की तरह
आस पास हूँ तेरे अहसास की तरह

Wednesday, 8 March 2017




सुंदर तन की परिधि में सिमटा
एक कोमल ह्रदय ,भाव से तरबतर
और उसकी भी गहराइयों में छुपा
एक अद्भुत गहरा व्यक्तितव
अपनी अस्तित्व की खोज में
निरंतर जीवन की धुरी पे घूमता
धरा सा धैर्य और विस्तृत आकाश सा विश्वास लिए
आयी हो तुम स्वयं में बहुत कुछ खास लिए..



महिला दिवस की शुभकामनायें
साथ ही आभार उन सभी दोस्तों का जिन्होंने नारी मन की गहराइयो को समझने की और उसे स्वीकारने का प्रयास किया और सिर्फ महिला दिवस पर ही नहीं अपने जीवन में भी उसे वही सम्मान दिया जो आज यहाँ सबकी पोस्ट में दिखाई दे रहा है......

Wednesday, 1 March 2017






मन को छूती तस्वीर, जिसके स्पर्श से मन से निकले उद्गार उतर आये फिर एक रचना बन

सुदूर पर्वतों पर गूँजी है प्रतिध्वनि कोई
झरोखे का पट हौले से खोल कर
घुल कर हवाओं के साथ जैसे पहुँची है
कानो में मीठी से शब्द घोलती,सी
कुछ अनकही मुझसे बोलती सी
काफी की चुस्कियो में एक मिठास सी घोलती सी
सुदूर पर्वतो पर गूँजी है प्रतिध्वनि कोई
अपनी आहट से अनाहत जगाती हुई
कोई गीत मधुर गुनगुनाती हुई
सुदूर पर्वतो पर गूँजी है प्रतिध्वनि कोई ......

Thursday, 2 February 2017







शब्दो के मोती चुनकर,जीवन गीत पिरोना है

शब्दो के मोती चुनकर,जीवन गीत पिरोना है
नैनो की बहती सरिता ,सागर में डुबोना है
बाकि तो इस रंगमंच का,ये हँसना ये रोना है

कभी चलें कभी रुके,ये कैसा पथ सलोना है
अंदर तू बैठा मेरे फिर, क्या पाना क्या खोना है
बाकि तो इस रंगमंच का ,ये हँसना ये रोना है

मिटटी से उपजे हम ,एक दिन मिटटी ही होना है
तेरी ही गोद में सर रखकर, एक दिन नींद में सोना है
बाकी तो इस रंगमंच का ,ये हँसना ये रोना है

कुछ कुछ बाकि धुंधला सा मेरे मन कोना है
 तुझसे ही उजियारा लेकर,अंतर्मन को संजोना है
बाकि तो इस रंगनच का ये हँसना ये रोना है


 

Wednesday, 25 January 2017












मधुमास

मधुमास और पिया की आस
कुछ नयन का धीर,कुछ हिया की प्यास
मधुमास और पिया की आस

बसंत की बयार,और उमड़ता प्यार
सागर में उमड़े घुमड़े  ज्यो नदिया की धार
मधुमास और पिया की आस

कोयक की कूक,जैसे जिया की हूक
 बौराया मन ज्यो बौराई अमियारी जाये झुक
मधुमास और पिया की आस


Tuesday, 24 January 2017

बच्चे हमारी जीवन बगिया में खिले सूंदर और अद्भुत फूल.क्या सोचा है हमने की किस तरह का वातावरण ,किस तरह की खाद और किस तरह के पानी से सिंचित कर रहे हैं हम इन फूलो को जिन्हें बड़े ही जतन से हमने अपनी बगिया में उगाया है.
  बच्चो के प्रथम गुरु माता पिता और पहली पाठशाला उनका अपना घर और परिवार होता है जिनके बीच वह खेलते कूदते हुए सीखते, सम्हलते हुए बड़े होते हैं. जिस तरह का आचरण वो अपने आस पास देखते हैं वही उनके मन के दर्पण पे अंकित होता जाता है.अतः आवश्यकता है हमे इस बात का ध्यान रखने की, कि हम उनके मन के दर्पण में दुनिया की, परिवार की, दोस्तों की ,व्यव्हार की किस तरह कि छबि अंकित कर रहे है ......

    तुमसे जाना सूरज भैया और चंद मेरा मामा है
    माँ बाबा का हाथ पकड़ ही मैंने चलना जाना है
    चिड़िया जो फुदकती जाना, गाती वो एक गाना है
    मन के तारो की सरगम ,बस तुमको ही बजाना है
    दे दो जैसा रूप ,ढल जाऊँ मैं वैसे है
    कच्ची माटी रच लेती सुन्दर दुनिया जैसे है  
    संस्कारो से रंगों मुझे या कर दो बेरंग मुझे
    तुम्हारे ही पदचिन्हों में चलना है संग मुझे
    तुमसे जाना सूरज भैया और चंद मेरा मामा है
    माँ बाबा का हाथ पकड़ ही मैंने चलना जाना है
   

Sunday, 15 January 2017




वह रास्ता खड़ा वहीँ..

रात के अंधियारे में गुम है ,पर रास्ता है खड़ा  वहीँ
कुछ उलझे सुलझे  विचारो में गुम है, पर रास्ता है खड़ा वहीँ
ढूंढते है हम जिसे, इधर उधर बस उम्र भर
मन में गढ़ी दीवारों में गुम हैं ,पर रास्ता है खड़ा वहीँ

बस खोल दो झरोखे मन के ,कुछ उजाला जाने दो
अंदर के  हर कोने को, कुछ उजला हो जाने दो
दीवारों से झांकता तभी, दिखेगा तुम्हे वहीँ
पुकारता तुम्हे प्यार से ,वह रास्ता खड़ा वहीँ...