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Saturday, 12 September 2015

भर जाती है मन की गागर ज्यो ही 
छलक जाती हैं आँखें  जाने यूँ ही
हर आंसू हो दर्द में पगा जरुरी तो नहीं
खारा ही सही,पर कभी मिठास लिए होता है
ढलकता है पलकों से जब, कभी आस कभी गहरी प्यास लिए होता है
ओंस की बूंदो सा सहेज कर देखो ,जाने कितने अहसास लिए होता है

कभी यादों में छलके ,कभी वादो में छलके
कभी गिरते कभी सम्हलते इरादो में छलके 
कभी चाँद को भिगोये ,कभो तारो पे लुढ़क जाये   
आंसू बेबात कभी ,किनारो में छलके 
ढलकता है पलकों से जब, कभी आस कभी गहरी प्यास लिए होता है
ओंस की बूंदो सा सहेज कर देखो ,जाने कितने अहसास लिए होता है



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