कभी महसूस किया है ,फूलो की छुअन
हौले से टकराते उनके मुलायम से अहसाह को
वह रंगो का चटक अंदाज़ ,कहता क्या है सुनो कभी
सुना है ,हौले से पंखुड़ियों का खिलना
कुछ सकुचाते कुछ इठलाते संगीत का हवा में घुलना
मद्धम सी सांसो की लय पे नाचता है जैसे
हर सुबह ,हर फूल का वो चमन में खिलना
हाँ मैंने महसूस किया है ,उस हवा को
उस बयार को ,गुंजन के उस प्यार को
कलियों से उनके मनुहार को ,
हाँ किया है महसूस मैंने ,चमन से आती हर एक बयार को
सिमट जाता है मन ,सपना लिए खुलते फूलो को निहारने की आस लिए
loved it....
ReplyDeleteThanks Antas
DeleteThanks Antas
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