कृष्ण कृष्ण कृष्ण ..
कृष्ण के प्रेम में जिस दिन कृष्ण हो जाऊं उस दिन जीवन सफल ,बहुत कठिन है डगर पनघट की पर कृष्ण प्रेम उससे ज्यादा प्रबल हो आज के दिन यही प्रार्थना है मेरे कृष्ण से ...
तू चोर भी है ,पर चितचोर भी
इस ओर कभी उस ओर भी है
ढूंढे से मिलता नहीं क्यों ,
छिपता है पर चहुंओर भी है
तैरता है जो नैनो में नीर
उठती है जो मन में पीर
बसता है तू उसमे भी
तू राधा की धीर में है
खेले आँख मिचौली नटखट
इस धड़कन से उस पनघट तक
मेरे गीत में है ,संगीत में है
जीवन की हर रीत में है
खिलखिलाहटों में बसता है तू ही
मेरी हार में तू ,मेरी जीत में है
छुपता है पर छुपेगा कब तक
हर स्वासो से निःश्वासो के बीच
बंधी हुई हर रीत में है
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें

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