Pages

Tuesday, 8 September 2015













सुनो सच कहते है हम...
The sound of silence 

सुनो सच कहते हैं हम
कभी कभी निःशब्दता भी बातें करती है 
ढेर सारी बातें ,वैसे ही जैसे मेरी खिड़की से झांकता 
वो  गुलमोहर ,इठला जाता है झूम कर 
जब निहारती देर तलक,मुस्कुराता है ,कभी गुनगुनाता है
कभी इतरारता सा नाचता है,हवाओ की छेड़खानी में मगन 
ढंग में अपने ,रंग में अपने, ले जाता जैसे  दूर कही संग में अपने 
और बिखर  जाता है वो चटक रंग मन के केनवस पे साधिकार मुझे रंगता हुआ 
सो जाता है फिर निःशब्दता ओढ़, चांदनी के पलने में वह गुलमोहर 
दूधिया चांदनी फूट पड़ती है, लालिमा बन छूकर उसको 
और रह जाती है फिर एक निःशब्दता ,बातें करती हुई 
चांदनी और मेरे बीच देर तक ,कौन कहता है अकेले हैं हम
बातें करती हर सय नज़र आती है ,सुनो सच कहते हैं हम
कभी कभी निःशब्दता भी बातें करती है 
ढेर सारी बातें ,सुनो सच कहते हैं हम 
धड़कनो की लय के साथ बतियाया है कभी 
कभी सुनना ,निःशब्दता भी बातें करती है .....

No comments:

Post a Comment