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Friday, 25 December 2015



कैसे एक कविता बने ....

ज़िंदगी जब पन्नो में  बह जाए तो कविता बने 
मुस्कान बच्चे की दिल को लुभाये तो कविता बने 
छुर्रियों में दादी की ,जब उम्र मुस्कुराये तो कविता बने
खुशियो से जब माँ की आँखे भर आये तो कविता बने
आस पास ढूंढे कोई ,हर पल हर बात में कविता बने

वो हौले से हवा गालो को छू जाये तो कविता बने
वो भीनी सी रातरानी महक जाये तो कविता बने
वो चुपके से  खिड़की पे चाँद मुस्कुराये तो कविता बने
वो जुगनू कही दूर अँधेरे में टिमटिमाएं तो कविता बने
आस पास ढूंढे कोई ,हर पल हर बात में कविता बने

वो बेटियां जब जब पीहर आये तो कविता बने
वो सखियाँ कोई पुरानी बतियाये  तो कविता बने
वो रूठा कोई अपना मान जाये तो कविता बने
सुदूर कोई मनचाहा गीत गुनगुनाएं तो कविता बने
आस पास ढूंढे कोई ,हर पल हर बात में कविता बने

वो यादें प्रियतम की तड़पाएं तो कविता बने
वो इंतजार में दिन रात गुजर जाये तो कविता बने
वो आवाज प्रिय की कानो छू जाएँ तो कविता बने 
दर्पण देख कोई दुल्हन शर्माएं तो कविता बने
आस पास ढूंढे कोई ,हर पल हर बात में कविता बने


वो पंछी भोर में कलरव मचाये तो कविता बने
वो धीरे से गुलमोहर इतराये तो कविता बने
वो अमराई में कोई कोयल गीत गाये तो कविता बने
वो टिटहरी कोई बादल बुलाये तो कविता बने
आस पास ढूंढे कोई ,हर पल हर बात में कविता बने
ज़िंदगी जब पन्नो में बह जाए तो कविता बने


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