ज़िंदगी
चाहतें उस बच्चे की तरह है जो एक पल ज़िद पे अड़ जाता है ,तो दूसरे पल फुसला दे अगर प्यार से तो फिर बहल जाता है ,और ज़िंदगी ,ज़िंदगी एक माँ की तरह है जो समझा लेती है अंक में भर कर चाहतो को बड़े प्यार से ढेर सारी खूबसूरत कहानियो के साथ और थक हर कर सो जाती है मासूम बच्चो सी चाहते इस इंतज़ार में कि एक दिन आएगा चाँद आँगन में मेरे ढेर सारी सौगात लिए . भीग जाता है तब आँचल ज़िंदगी का उस उस मजबूर माँ की तरह जिसे मालूम ही नहीं की जरुरतो की फेहरिस्त में कब पूरी कर पायेगी वो मासूम सी ज़िद उन सोती हुई चाहतो की .कब आएगा कल्पनाओ के आकाश से निकल कर यथार्थ की धरातल पर उनका चाँद , पर आना तो होगा उसे इसी उम्मीद से रोज़ चलती है ज़िंदगी ,दौड़ती है ज़िंदगी रोज़ नए रफ़्तार लिए मन में आशा और ढेर सारा प्यार लिए.ज़िंदगी तुझे सलाम.
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