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Saturday, 10 October 2015

लहरे लहरो से मिलकर कहती हैं क्या 
सुनाई देता है दूर तलक गीत एक सुरीला संगीत कोई गूंजता है सुनो थम करलहरो की टकराहट प्रतिध्वनियों के अंदाज़ में हाँ मचलते हुए साहिल देखो मौजो की आवाज़ में बस यही तो है जीवन ,ख़ामोशी में गुनगुनाता हुआ कभी रुलाता कभी मुस्कुराता तो कभी खिलखिलाता हुआ हाँ जीवन है ये बहता हुआ ,साहिलों के बीच धार बनकर जीवन है ये जीता हुआ जीने की चाह लिए

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