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Thursday, 15 October 2015


एक झांकती हुई सी खिड़की..

एक झांकती हुई सी खिड़की है 
और एक अलसाया सा कोना घर का
झांकता सा बस मौन है पसरा हुआ 
शब्द आज नींद में है ,सो गए जैसे पन्नें ओढ़ 
शेष है बस मौन का समीकरण  
पन्नो और शब्दों के बीच
और झूमता सा एक गुलाब
मौन की अभिव्यक्ति में ..

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