शरद पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनायें...
छलक रहा जो प्रेम तेरे ,मन से अमृत की तरह
नहा रही है प्रकृति उसमे ,झूमकर भीगती है धरा
सुन राधिके ,तेरे कृष्ण की बाँसुरी क्या सुना रही
प्रेमलय पे मंत्रमुग्ध सी गोपियाँ थिरकती जा रही
बरसा रहा इस प्रेम को चाँद वह ,ओंस बना
भीगा गया लो आज फिर,किसी मन का वो सूखा कोना ..
No comments:
Post a Comment