Pages

Wednesday, 14 October 2015






जीवन के हर रंग को समेटे हुए खुद  में  
देखो मुस्कुराता सा चमका है एक इन्द्रधनुष  ,
सुदूर कही आकाश  में  
उतार  लिए  है आज मैंने हर रंग ,अंतरंग होकर 
और खिल उठा है रंग  मेरा सतरंगी  ज़िंदगी की तरह.
हर रंग  को जीना सीखा रही है ज़िंदगी 
सांसो की लय पर बस आ रही कभी जा रही है ज़िंदगी
आगोश में समेट लूँ आज तुझको ये ज़िंदगी
छा जाये आकाश में इंद्रधनुषी ये रंग तेरा 
वो एक टिका काजल का मेरे, छुपा दिया तेरे रंगो में 
क्योकि भाता बहुत है मुझे इन्द्रधनुष मुस्कुराता हुआ ...

6 comments: