श्रावण मास
सावन वह मास जब अपने सुन्दरतम रूप में खिल उठती है धरती ,चारो और फैली हरियाली की चुनर ओढ़ कर..सावन से शुरू होता है फिर से त्योहारो का सिलसिला ,गांव में आज भी पड़ जाते हैं सावन के झूले उल्लास के प्रतीक के रूप में. शिव का अतिप्रिय मास सावन, जिसका उत्साह हमे दिखाई देता है उन कावड़ियों के समूह में जो चले जाते है बम भोले रटते हुए कठिन राहो पर बेपरवाह मस्त होकर शिव के रंग में रंगे हुए .
हमारी संस्कृति में हर मास ,हर त्यौहार प्रतीकात्मक रूप से मनाया जाता है जिसके पीछे के गहरे चिंतन की समझ खो दी है हमने वक़्त के साथ .सावन प्रतीक है उस विश्वास का ,आस्था का कि हर एक कठिन दौरके बाद आगमन होता है सरलता का ,तपन के बाद शीतलता का ,अगर प्यास है तो तृप्ति भी होगी ,बस पूरी आस्था के साथ चलते जाना है हमे ऊंचीं नीची पगडंडियों पर जीवन की उन कावड़ियों की तरह गाते गुनगुनाते हुए .माना की ये सब शब्द लिखना आसान है ,रास्ते आसान नहीं पर पर ईश्वर ने हमे क्षमता तो दी है चलते की ,और इसलिए दिए है प्रतीक के रूप में इतने त्यौहार ,इतने वार ,इतने अलग अलग प्रकृति वाले मौसम कभी तपिश ,कभी ठिठुरन ,कभी मद बरसाता मधुमास कभी झूला झूलता सावन और साथ में हर मौसम से जुड़े व्रत त्यौहार जिनसे आता है जीवन में आत्म- संयम ,अनुशासन जिनके द्वारा हर मौसम के अनुरूप हम ढल जाये आसानी से सहज रूप में प्रकृति के साथ तारतम्य बनाते हुए .
सावन के प्रथम सोमवार की बधाई स्वीकार करें .

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