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Tuesday, 11 August 2015




यादें.......

यादों के उजाले जलने दो राहो में
सफर के अंधेरो में ,ये काम आते  हैं
कभी ढलता सूरज ,कभी फैली चांदनी
कभी रात अँधेरी हो जब
जुनगुओ की तरह ,ये रास्ते दिखाते है

समय फिसलता है जब ,मुट्ठी से  रेत बन
यादों के झोंके तब मन को सहलाते  हैं
जीवन के सफर के लम्बे  हैं रास्ते 
कभी साथ है कारवां ,कभी साथ सिर्फ रास्ते 
पगडंडियों में भटकते ,अकेले जब हम फिरें 
यादो के ये साये ,हमसफ़र बन जाते हैं

चलते हुआ जाना है ,रास्तो से  ये सीख ली
चाहतो से न भाग तू ,ना यादों से  हाँथ छुड़ा
जीवन में जब तक सांसों का ताना बाना है
हर नए मोड़ पर,
नयी यादों का ठिकाना है 

यादों के उजाले जलने दो राहो में
सफर के अंधेरो में ,काम आते  हैं
कभी ढलता सूरज कभी फैली चांदनी
कभी रात अँधेरी हो जब
जुनगुओ की तरह ,ये रास्ते दिखाते हैं


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