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Thursday, 6 August 2015

    रूपांतरण

यह एक बहुत ही सुन्दर तस्वीर मिली आज यूँ  ही भटकते हुए. अपने आप में कितना गहरा अर्थ लिए है ये एक चित्र ,जलती हुई तीली  और खिलता हुआ कमल . कितना गहरा राज़ जीवन की सार्थकता का .जीवन ,हाँ हर दिन मोम की तरह पिघलता हुआ जीवन ,और हम सभी  किस रूप में  इसे  लेते हैं यही  दृषिकोण निर्धारित  करता  है की हमने  जीवन को सिर्फ  काटा  है या जीवन को  जिया भी  है. सब  दृष्टिकोण की बात  है कि हम क्या होना पसंद करते है ,इस जलती हुई तीली से निकलता हुआ  काला गहरा धुँआ या इस जलन में भी हम कल्पना कर सकते है उस धुएं के एक कमल में रूपांतरण की .हर दिन हमे कोई सीख दे कर जाता हैं मैंने तो पा ली आज की शिक्षा आप क्या सोचते हैं इस विषय में .मै प्रयासरत हूँ .हाँ , प्रयासरत क्योकि सीखना एक अविरल और निरंतर प्रक्रिया हैं बहती हुई नदी की तरह , इस चिंतन के साथ 

शुभ रात्रि 

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