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Saturday, 22 August 2015


एक अभिनन्दन पत्र आप सभी मित्रो के नाम ,अवश्य पढ़े...
जीवन : निर्झर से सरिता होने की यात्रा है..


निर्झर लेखनी एक प्रयास है पूर्णता नहीं.निर्झर लेखनी एक निरंतर प्रक्रिया है  सीखने की , प्रतिदिन जीवन से, आस पास की घटित घटनाओ से ,दूसरो के जीवन से ,मन में हिलोरे लेती भावनाओ से ,तो कभी दिमाग में बादलो की तरह घुमड़ते विचारो से ,उन्हें पहचानने की ,समझने की और और मन की परिपाटी में मंथन कर उसमे से सीख रुपी अमृत को आत्मसात कर जीवन में उतारने की ताकि एक दिन बन जाये जीवन बहती हुई नदी की तरह शांत सुरम्य  और अपने अंदर पड़े सभी पथरो ,मिटटी ,कंकड़ो से ऊपर उठ निर्मल जल की धारा के रूप में परिणित . 
     पर उस शांत नदी के बहाव में बदलने के पहले गुजरना होता है निर्झर को ,ऊँचे नीचे चट्टानों से ,उठते ,गिरते रास्तो से तब कही निर्झर बदलता है एक समलत पे बहती धारा के रूप में शांत ,सुरम्य गहराई लिए निर्मल और निश्छल.

वही जल ,वही उद्गम है निर्झर और सरिता का एक,पर एक ही यात्रा के दो भिन्न पहलू  ,जीवन यात्रा के दो अलग -अलग स्तर  को दर्शाते जिनका उद्देश्य एक ही है सागर की ओर गमन.उसी तरह हम सब एक ही स्त्रोत्र से निकल कर  एक ही यात्रा के सहभागी है.
   
मै आभारी हूँ अपने मित्रो का जिन्होंने मुझे कदम कदम पर ये बताया की किस तरह आगे बढ़ने के लिए  अपनी लेखनी को और गहराई में ढालने के लिए सुधार की आवश्यकता है. आभारी हूँ मेरी सखी का जिसने कुछ दिनों पहले मुझे बताया की कुछ बात है जो पहले जैसे नहीं मन को छू रही है लेखनी मेरी. मैंने अपनी हर पोस्ट पे यही लिखा है मै प्रयासरत हूँ  क्योकि सीखना एक निरंतर प्रक्रिया है अंत तक हमे हर दिन हर पल सीखना है.
  मेरी रचनाओ के साथ पूर्णतः ईमानदारी करने की चेष्टा होती है मेरी ,जो महसूस कर पाती हूँ अपने आस पास के वातावरण से ,अपने जीवन से मित्रो के जीवन से वही ढालने का प्रयास होता है मेरा और हमेशा रहेगा .ह्रदय से आमंत्रित है आप सबके विचार ,आप सब  का प्यार ,आप सब की प्रेरणा जो मुझे रोज़ आगे बढ़ाती है एक कदम और निर्झर से नदी बनने की प्रक्रिया में . मेरा सौभाग्य जो इतने सच्चे और अच्छे मित्रो का साथ ईश्वर ने दिया मुझे .ह्रदय से पूरी प्रसन्नता के साथ अभिनन्दन. 

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